TAJDHAM PAGALKHANA SHARIF

सलाम

|| सलाम ||
                     सलाम उस पर के जिसने बेकशों की दस्तगीरी की I
                     सलाम उस पर के जिसने बादशाओ मे फकीरी की I
                     सलाम उस पर के जिसके घर मे चाँदी थी न सोना था I
                     सलाम उस पर के जिसका-टूटा बोरीय बिछौना था I
                     ऐ बादे शबा उसने पैगाम मेरा कहेना I
                     बंदों का उस मालीक से सलाम मेरा कहेना I
                     मैं तुम्हारे दर का फकीर हूँ I
                     ईस दर को मेरा सलाम है...(२)
                     मैं दीवाना हूँ बस आपका...(२)
                     लब पर ही बस आपका ....मैं तुम्हारे दर...
                     रसुल अल्हा सल्ले अल्ला,बीबी या हबीब
                     मेरी जिन्दगी को निहाल कर II१II
                     बाबा तू मुझ पे ख्याल कर...(२)
                     वो रहेम की मुझ पर रख नज़र...(२)
                     उस नज़रको मेरा सलाम है…..(२) मैं तुम्हारे दर...II२II
                     ईस निगाहों मे है तुही तू
                     करे पुरा तू ही आरजू...(२)
                     तेरे हाथो मेरी आबरू...(२)
                     वो रहबर को मेरा सलाम हैं...(२) मैं तुम्हारे दर .........
                     ये दर है दाता जन्नत निशा II३II